श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.127.33 
एतस्मिन् भ्रातरौ वीरौ वैदेह्या सह राघवौ।
सुग्रीवश्च महातेजा राक्षसश्च विभीषण:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
‘इसमें विदेह राजकुमारी सीता के साथ दोनों वीर रघुवंशी भाई बैठे हैं और इसमें पराक्रमी सुग्रीव और राक्षस विभीषण भी बैठे हैं।’॥33॥
 
‘In this, the two brave Raghuvanshi brothers are seated along with Videha princess Sita and in this, the mighty Sugreeva and the demon Vibhishana are also seated.’॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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