श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  6.127.26-27h 
सदाफलान् कुसुमितान् वृक्षान् प्राप्य मधुस्रवान्॥ २६॥
भरद्वाजप्रसादेन मत्तभ्रमरनादितान्।
 
 
अनुवाद
'भारद्वाज ऋषि की कृपा से मार्ग के सभी वृक्ष नित्य पुष्पित हो गए हैं और उनमें मधु प्रवाहित हो रहा है। उन वृक्षों पर मदमस्त भौंरे निरन्तर गुनगुनाते रहते हैं। बंदर भी उन्हें पाकर अपनी भूख-प्यास बुझाने लगे हैं।॥26 1/2॥
 
‘By the grace of sage Bharadwajji, all the trees on the way have become ever-flowering and flow with honey. The intoxicated bumblebees keep on humming incessantly on those trees. The monkeys have started quenching their hunger and thirst by getting them.॥ 26 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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