श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  6.127.25-26h 
अथैवमुक्ते वचने हनूमानिदमब्रवीत्॥ २५॥
अर्थ्यं विज्ञापयन्नेव भरतं सत्यविक्रमम्।
 
 
अनुवाद
भरत के ऐसा कहने पर हनुमानजी ने सत्य और पराक्रम से युक्त भरत से कोई सार्थक और सच्ची बात कहने को कहा- ॥25 1/2॥
 
When Bharata said this, Hanuman asked Bharata, who was full of truth and bravery, to tell him a meaningful and true thing - ॥25 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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