श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  6.127.24-25h 
कच्चिन्न खलु कापेयी सेव्यते चलचित्तता।
नहि पश्यामि काकुत्स्थं राममार्यं परंतपम्॥ २४॥
कच्चिन्न चानुदृश्यन्ते कपय: कामरूपिण:।
 
 
अनुवाद
‘वीर वानरों! वानरों का मन स्वभावतः चंचल होता है। क्या तुमने भी यही गुण अपना लिया है? क्या तुमने श्री राम के आगमन का झूठा समाचार फैला दिया है? क्योंकि अब तक मैं शत्रुओं को संताप देने वाले ककुत्स्थ कुल के रत्न आर्य श्री राम के दर्शन नहीं कर पाया हूँ। और इच्छानुसार रूप धारण करने वाले वानर भी कहीं दृष्टिगोचर नहीं हो रहे हैं?’॥24 1/2॥
 
‘Valiant monkeys! The mind of monkeys is naturally restless. Have you also adopted the same quality? Have you spread the false news of Shri Rama's arrival? Because till now I have not been able to see Arya Shri Ram, the jewel of the Kakutstha clan, who torments the enemies. And the monkeys who assume any form as per their wish are also not visible anywhere?’॥ 24 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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