श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.127.23 
कृत्स्नं तु नगरं तत् तु नन्दिग्राममुपागमत्।
समीक्ष्य भरतो वाक्यमुवाच पवनात्मजम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब भरत ने देखा कि अयोध्यापुरी के सभी नागरिक नन्दिग्राम में आ गए हैं, तब उन्होंने पवनपुत्र हनुमान् से कहा-॥23॥
 
When Bharata saw that all the citizens of Ayodhyapuri have come to Nandigram, then he said to Hanuman, the son of wind -॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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