श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  6.127.21-22 
प्रत्युद्ययौ यदा रामं महात्मा सचिवै: सह।
अश्वानां खुरशब्दैश्च रथनेमिस्वनेन च॥ २१॥
शङ्खदुन्दुभिनादेन संचचालेव मेदिनी।
गजानां बृंहितैश्चापि शङ्खदुन्दुभिनि:स्वनै:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस समय महात्मा भरत श्री राम की अगवानी के लिए आगे आए। घोड़ों की टापों, रथ के पहियों और शंखों व नगाड़ों की गगनभेदी ध्वनि से मानो सारी पृथ्वी हिल रही हो। शंखों व नगाड़ों की ध्वनि के साथ हाथियों की गर्जना भी पृथ्वी को कंपा रही थी।
 
At that time Mahatma Bharata came forward to receive Shri Ram. The sound of the horses' hooves, the wheels of the chariot and the deep sounds of the conches and drums made the entire earth seem to be shaking. The roaring sound of the elephants mixed with the sound of the conches and drums also made the earth tremble.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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