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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना
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श्लोक 2
श्लोक
6.127.2
दैवतानि च सर्वाणि चैत्यानि नगरस्य च।
सुगन्धमाल्यैर्वादित्रैरर्चन्तु शुचयो नरा:॥ २॥
अनुवाद
‘सदाचारी मनुष्य को चाहिए कि वह कुलदेवता तथा नगर के समस्त देवालयों की धूमधाम से तथा सुगन्धित पुष्पों से पूजा करे।॥2॥
‘A man of virtuous conduct should worship the family deity and all the temples of the city with fanfare and fragrant flowers.॥ 2॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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