| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना » श्लोक 11-12h |
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| | | | श्लोक 6.127.11-12h  | धृष्टिर्जयन्तो विजय: सिद्धार्थश्चार्थसाधक:।
अशोको मन्त्रपालश्च सुमन्त्रश्चापि निर्ययु:॥ ११॥
मत्तैर्नागसहस्रैश्च सध्वजै: सुविभूषितै:। | | | | | | अनुवाद | | धृष्टी, जयन्त, विजय, सिद्धार्थ, अर्थसाधक, अशोक, मन्त्रपाल और सुमंत्र- ये आठ मंत्री ध्वजों और आभूषणों से सुशोभित मतवाले हाथियों पर सवार थे। 11 1/2॥ | | | | Dhrishti, Jayant, Vijay, Siddhartha, Arthasadhak, Ashoka, Mantrapala and Sumantra – these eight ministers rode on intoxicated elephants decorated with flags and ornaments. 11 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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