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श्लोक 6.126.53  |
स तु दत्तवर: प्रीत्या वानरैश्च समागतै:।
पुष्पकेण विमानेन किष्किन्धामभ्युपागमत्॥ ५३॥ |
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| अनुवाद |
| वर पाकर प्रसन्नता से भरकर श्री रामचन्द्रजी वानरों के साथ पुष्पक विमान द्वारा किष्किन्धा आये ॥53॥ |
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| Filled with happiness after getting the boon, Shri Ramchandraji came to Kishkindha by Pushpak aircraft along with the monkeys. 53॥ |
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