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श्लोक 6.126.52  |
तैश्च दत्तवर: श्रीमानृषिभिश्च समागतै:।
सुरर्षिभिश्च काकुत्स्थो वराँल्लेभे परंतप:॥ ५२॥ |
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| अनुवाद |
| वहाँ आये हुए ऋषि-मुनियों ने शत्रुओं को पीड़ा देने वाले श्रीमन रघुवीर को वर दिया। उनसे श्री राम ने वर प्राप्त किया॥52॥ |
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| ‘The sages and saints who had come there gave a boon to Shriman Raghuvir, the tormentor of enemies. Shri Ram received a boon from them.॥ 52॥ |
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