श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.126.52 
तैश्च दत्तवर: श्रीमानृषिभिश्च समागतै:।
सुरर्षिभिश्च काकुत्स्थो वराँल्लेभे परंतप:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ आये हुए ऋषि-मुनियों ने शत्रुओं को पीड़ा देने वाले श्रीमन रघुवीर को वर दिया। उनसे श्री राम ने वर प्राप्त किया॥52॥
 
‘The sages and saints who had come there gave a boon to Shriman Raghuvir, the tormentor of enemies. Shri Ram received a boon from them.॥ 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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