श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  6.126.51 
स शक्रेण समागम्य यमेन वरुणेन च।
महेश्वरस्वयंभूभ्यां तथा दशरथेन च॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
उसके बाद श्रीरघुनाथजी क्रमशः इन्द्र, यम, वरुण, महादेवजी, ब्रह्माजी और महाराज दशरथ से मिले। 51॥
 
After that Shri Raghunathji met Indra, Yama, Varun, Mahadevji, Brahmaji and Maharaj Dashrath respectively. 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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