श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  6.126.44-45 
कौशेयवस्त्रां मलिनां निरानन्दां दृढव्रताम्।
तया समेत्य विधिवत् पृष्ट्वा सर्वमनिन्दिताम्॥ ४४॥
अभिज्ञानं मया दत्तं रामनामाङ्गुलीयकम्।
अभिज्ञानं मणिं लब्ध्वा चरितार्थोऽहमागत:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
'उसने रेशमी साड़ी पहनी हुई थी। उसका शरीर मलिन और उदास लग रहा था और वह अपने सतीत्व के पालन में दृढ़ थी। उससे मिलने के बाद, मैंने उस पतिव्रता स्त्री से सारी बातें पूछीं और पहचान के लिए उसे श्री राम नाम लिखी अंगूठी दी। मैंने पहचान के तौर पर उससे चूड़ामणि भी ले ली और अत्यंत संतुष्ट होकर लौट आया।'
 
‘She was wearing a silk saree. Her body looked dirty and joyless and she was firmly committed to the observance of her chastity. After meeting her, I enquired from that virtuous and faithful lady about all the details and gave her the ring inscribed with the name of Shri Ram for identification. I also took the Chudaamani from her as identification and returned with great satisfaction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)