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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना
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श्लोक 4
श्लोक
6.126.4
स पृष्टो राजपुत्रेण बृस्यां समुपवेशित:।
आचचक्षे तत: सर्वं रामस्य चरितं वने॥ ४॥
अनुवाद
राजकुमार भरत के इस प्रकार पूछने पर हनुमानजी ने गद्दी पर बैठकर उन्हें श्री रामजी के वनवास का सम्पूर्ण वृत्तांत सुनाया-॥4॥
On Prince Bharat's asking in this manner, Hanuman, seated on a cushion, narrated to him the entire story of Sri Rama's exile to Him -॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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