श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.126.3 
राघवस्य हरीणां च कथमासीत् समागम:।
कस्मिन् देशे किमाश्रित्य तत्त्वमाख्याहि पृच्छत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! श्री रघुनाथजी और वानरों का यह मिलन कैसे हुआ? किस देश में और किस कारण से? मैं यह जानना चाहता हूँ। मुझे ठीक-ठीक बताओ।'
 
Soumya! How did this meeting of Shri Raghunathji and the monkeys happen? In which country and for what reason? I want to know this. Tell me exactly.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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