श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.126.12 
तेषां पुरस्ताद् बलवान् गच्छतां गहने वने।
विनदन् सुमहानादं विराध: प्रत्यदृश्यत॥ १२॥
 
 
अनुवाद
घने वन में जाते समय उन तीनों ने विराध नामक एक बलवान राक्षस को बड़े जोर से दहाड़ते देखा॥12॥
 
While going into the dense forest, the three of them saw a powerful demon named Viradha roaring loudly.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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