श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  6.126.10-11 
अपयाते त्वयि तदा समुद‍्भ्रान्तमृगद्विजम्।
परिद्यूनमिवात्यर्थं तद् वनं समपद्यत॥ १०॥
तद्धस्तिमृदितं घोरं सिंहव्याघ्रमृगाकुलम्।
प्रविवेशाथ विजनं स महद् दण्डकावनम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'जब आप लौटे, तो वह वन चारों ओर से अत्यंत वीरान हो गया था। वहाँ के पशु-पक्षी भयभीत थे। तब उस वन को छोड़कर श्रीराम विशाल दण्डकारण्य में प्रवेश कर गए, जो निर्जन था। वह घना वन हाथियों द्वारा रौंदा हुआ था। वह सिंह, व्याघ्र और मृगों से भरा हुआ था।' 10-11
 
‘When you returned, that forest became very desolate from all sides. The animals and birds there were scared. Then leaving that forest, Shri Ram entered the huge Dandakaranya, which was uninhabited. That dense forest was trampled by elephants. It was full of lions, tigers and deer. 10-11.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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