श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.126.1 
बहूनि नाम वर्षाणि गतस्य सुमहद्वनम्।
शृणोम्यहं प्रीतिकरं मम नाथस्य कीर्तनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
मेरे स्वामी श्री राम को वन में गए हुए बहुत वर्ष हो गए हैं। आज इतने वर्षों के बाद मुझे उनके मनोहर प्रवचन सुनने का अवसर मिला है॥1॥
 
‘It has been many years since my master Shri Ram went to the vast forest. After so many years, today I have got the chance to listen to his delightful discourse.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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