श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.125.5 
श्रुत्वा तु मां कुशलिनमरोगं विगतज्वरम्।
भविष्यति गुह: प्रीत: स ममात्मसम: सखा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
निषादराज गुह यह सुनकर बहुत प्रसन्न होंगे कि मैं सुरक्षित, स्वस्थ और निश्चिन्त हूँ; क्योंकि वे मेरे मित्र हैं। वे मेरे लिए मेरी आत्मा के समान हैं॥5॥
 
‘Nishadraj Guha will be very happy to hear that I am safe, healthy and free from worries; because he is my friend. He is like my own soul to me.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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