श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.125.4 
शृङ्गवेरपुरं प्राप्य गुहं गहनगोचरम्।
निषादाधिपतिं ब्रूहि कुशलं वचनान्मम॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'श्रृंगवेरपुर पहुँचकर वनवासी निषादराज गुह से मिलिए और उन्हें मेरा कुशलक्षेम बताइए।
 
‘After reaching Shringaverpur, please meet the forest dweller Nishadraja Guha and convey my well-being to him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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