श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  6.125.35-36h 
तं धर्ममिव धर्मज्ञं देहबन्धमिवापरम्॥ ३५॥
उवाच प्राञ्जलिर्वाक्यं हनूमान् मारुतात्मज:।
 
 
अनुवाद
दूसरे धर्मज्ञ की भाँति मनुष्य रूप में आए हुए भरत के पास पहुँचकर पवनकुमार हनुमान्‌जी ने हाथ जोड़कर कहा -॥35 1/2॥
 
Reaching Bharata, who had come in human form like another Dharmaknower, Pawankumar Hanuman ji folded his hands and said -॥ 35 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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