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ramayan 6.125.33-34h: भरतजी चारों वर्णों के लोगों को सभी प्रकार के भय से सुरक्षित रखते थे। उनके मंत्री, पुरोहित और सेनापति भी उनके साथ योगाभ्यास की अवस्था में रहते थे और भगवा वस्त्र धारण करते थे।   |   ramayan सर्ग 6.125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  6.125.33-34h 
चातुर्वर्ण्यस्य लोकस्य त्रातारं सर्वतो भयात्।
उपस्थितममात्यैश्च शुचिभिश्च पुरोहितै:॥ ३३॥
बलमुख्यैश्च युक्तैश्च काषायाम्बरधारिभि:।
 
 
अनुवाद
भरतजी चारों वर्णों के लोगों को सभी प्रकार के भय से सुरक्षित रखते थे। उनके मंत्री, पुरोहित और सेनापति भी उनके साथ योगाभ्यास की अवस्था में रहते थे और भगवा वस्त्र धारण करते थे।
 
Bharataji kept the people of all four castes safe from all kinds of fear. His ministers, priests and commanders also lived with him in a state of yoga and wore saffron clothes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)