श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.125.3 
अयोध्यां त्वरितो गत्वा शीघ्रं प्लवगसत्तम।
जानीहि कच्चित् कुशली जनो नृपतिमन्दिरे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे महाकपिश्रेष्ठ! आप शीघ्र ही अयोध्या जाकर पता लगाएँ कि राजमहल में सब लोग सकुशल हैं या नहीं॥3॥
 
O great Kapishreshtha! You should go to Ayodhya as soon as possible and find out whether everyone in the royal palace is safe or not.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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