श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.125.26 
सोऽपश्यद् रामतीर्थं च नदीं वालुकिनीं तथा।
वरूथीं गोमतीं चैव भीमं शालवनं तथा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में उन्होंने परशुराम तीर्थ, वालुकिनी नदी, वरुथी, गोमती और भयानक साल वन देखा॥26॥
 
On the way he saw the Parashurama Tirtha, the Valukini river, Varuthi, Gomati and the terrible Sal forest.॥26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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