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ramayan 6.125.18: हे वीर वानर! भरत के विचार और निश्चय को जानकर, हम इस आश्रम से चले जाएँ, उससे पहले ही शीघ्र लौट जाओ। ॥18॥   |   ramayan सर्ग 6.125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.125.18 
तस्य बुद्धिं च विज्ञाय व्यवसायं च वानर।
यावन्न दूरं याता: स्म: क्षिप्रमागन्तुमर्हसि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे वीर वानर! भरत के विचार और निश्चय को जानकर, हम इस आश्रम से चले जाएँ, उससे पहले ही शीघ्र लौट जाओ। ॥18॥
 
Valiant monkey! Knowing Bharat's thoughts and determination, return quickly before we leave this hermitage.' ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)