श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.125.15 
ज्ञेया: सर्वे च वृत्तान्ता भरतस्येङ्गितानि च।
तत्त्वेन मुखवर्णेन दृष्टॺा व्याभाषितेन च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ की सारी घटनाएँ और भरत के प्रयत्न तुम्हें विस्तार से जानने चाहिए। मुख-मुद्रा, दृष्टि और बातचीत से उनके भावों को समझने का प्रयत्न करना चाहिए। 15॥
 
You should know all the incidents there and Bharat's efforts in detail. One should try to understand their feelings through facial expression, gaze and conversation. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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