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श्लोक 6.125.15  |
ज्ञेया: सर्वे च वृत्तान्ता भरतस्येङ्गितानि च।
तत्त्वेन मुखवर्णेन दृष्टॺा व्याभाषितेन च॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| वहाँ की सारी घटनाएँ और भरत के प्रयत्न तुम्हें विस्तार से जानने चाहिए। मुख-मुद्रा, दृष्टि और बातचीत से उनके भावों को समझने का प्रयत्न करना चाहिए। 15॥ |
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| You should know all the incidents there and Bharat's efforts in detail. One should try to understand their feelings through facial expression, gaze and conversation. 15॥ |
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