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श्लोक 6.125.14  |
एतच्छ्रुत्वा यमाकारं भजते भरतस्तत:।
स च ते वेदितव्य: स्यात् सर्वं यच्चापि मां प्रति॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| यह सुनकर भरत के मुख-भाव पर ध्यान दो और उसे समझने का प्रयत्न करो। मेरे प्रति भरत के कर्तव्य और व्यवहार को भी समझने का प्रयत्न करो॥14॥ |
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| Pay attention to Bharata's facial expression after hearing this and try to understand it. Also try to understand Bharata's duty and behaviour towards me.॥ 14॥ |
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