श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 124: श्रीराम का भरद्वाज आश्रम पर उतरकर महर्षि से मिलना और उनसे वर पाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.124.4 
आज्ञावशत्वे भरतो जटिलस्त्वां प्रतीक्षते।
पादुके ते पुरस्कृत्य सर्वं च कुशलं गृहे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! भरत आपके अधीन है। वह लंबी जटाओं से आपके आगमन की प्रतीक्षा करता है। आपकी चरण पादुकाएँ सामने रखकर वह अपना सारा काम करता है। आपके घर और नगर में भी सब कुशल है।॥4॥
 
‘Raghunandan! Bharat is under your command. He waits for your arrival with long matted hair. He does all his work keeping your sandals in front of him. Everything is fine in your house and in the city too.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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