श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 124: श्रीराम का भरद्वाज आश्रम पर उतरकर महर्षि से मिलना और उनसे वर पाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.124.3 
एवमुक्तस्तु रामेण भरद्वाजो महामुनि:।
प्रत्युवाच रघुश्रेष्ठं स्मितपूर्वं प्रहृष्टवत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्र जी के इस प्रकार पूछने पर महामुनि भरद्वाज ने उन रघुश्रेष्ठ श्री राम से प्रसन्नतापूर्वक मुस्कुराते हुए कहा-॥3॥
 
On Shri Ramchandra ji asking this way, Mahamuni Bhardwaj smiled and said happily to that Raghusrestha Shri Ram -॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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