श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 124: श्रीराम का भरद्वाज आश्रम पर उतरकर महर्षि से मिलना और उनसे वर पाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.124.2 
सोऽपृच्छदभिवाद्यैनं भरद्वाजं तपोधनम्।
शृणोषि कच्चिद् भगवन् सुभिक्षानामयं पुरे।
कच्चित् स युक्तो भरतो जीवन्त्यपि च मातर:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भगवान राम ने तपस्वी भारद्वाज ऋषि को प्रणाम करके उनसे पूछा, "हे प्रभु! क्या आपने अयोध्यापुरी के विषय में कुछ सुना है? वहाँ तो अच्छा और समृद्ध समय है न? भरत तो सदैव अपनी प्रजा के कल्याण के लिए तत्पर रहते हैं न? मेरी माताएँ तो जीवित हैं न?"
 
After paying obeisance to sage Bharadwaj, who was endowed with great penance, Lord Rama asked him, "O Lord! Have you heard anything about Ayodhyapuri? Times are good and prosperous there, aren't they? Bharata is always devoted to the welfare of his subjects, isn't he? My mothers are alive, aren't they?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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