Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.123.53: ये पुण्यात्मा त्रिपथगा गंगाजी को देख रहे हैं, जिनके तट पर नाना प्रकार के पक्षी कलरव कर रहे हैं और द्विजवृन्द पुण्यकर्मों में तत्पर हैं। उनके तट पर वन के वृक्ष सुन्दर पुष्पों से परिपूर्ण हैं। 53॥ | ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इयं च दृश्यते गङ्गा पुण्या त्रिपथगा नदी।
नानाद्विजगणाकीर्णा सम्प्रपुष्पितकानना॥ ५३॥
अनुवाद
ये पुण्यात्मा त्रिपथगा गंगाजी को देख रहे हैं, जिनके तट पर नाना प्रकार के पक्षी कलरव कर रहे हैं और द्विजवृन्द पुण्यकर्मों में तत्पर हैं। उनके तट पर वन के वृक्ष सुन्दर पुष्पों से परिपूर्ण हैं। 53॥
These virtuous Tripathagas are seeing the river Ganga, on whose banks different types of birds are chirping and Dwijvrind is engaged in virtuous deeds. The trees of the forest on its banks are full of beautiful flowers. 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥