श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.123.52 
एषा सा यमुना रम्या दृश्यते चित्रकानना।
भरद्वाजाश्रम: श्रीमान् दृश्यते चैष मैथिलि॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
‘मिथिलेशकुमारी! विचित्र वनों से सुशोभित सुन्दर यमुना नदी दिखाई दे रही है और भव्य भारद्वाज आश्रम भी दिखाई दे रहा है॥ 52॥
 
‘Mithilesh Kumari! The beautiful river Yamuna, adorned with strange forests, is visible and the magnificent Bharadwaj Ashram is also visible.॥ 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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