Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.123.51: 'सुतनु! वह चित्रकूट पर्वत जगमगा रहा है। वहीं कैकेयी के पुत्र भरत मुझे प्रसन्न करके वापस ले जाने आए थे।'   |   ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  6.123.51 
असौ सुतनु शैलेन्द्रश्चित्रकूट: प्रकाशते।
अत्र मां कैकयीपुत्र: प्रसादयितुमागत:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
'सुतनु! वह चित्रकूट पर्वत जगमगा रहा है। वहीं कैकेयी के पुत्र भरत मुझे प्रसन्न करके वापस ले जाने आए थे।'
 
‘Sutnu! That mountainous Chitrakoot is shining. That is where Kaikeyi's son Bharat came to please me and bring me back. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)