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ramayan 6.123.5: विशाललोचने! यह राक्षसराज रावण राख के ढेर के समान सो रहा है। वह बड़ा हिंसक था और ब्रह्माजी ने उसे वरदान दिया था; परन्तु तुम्हारे लिए मैंने उसे मार डाला है॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.123.5 
एष दत्तवर: शेते प्रमाथी राक्षसेश्वर:।
तव हेतोर्विशालाक्षि निहतो रावणो मया॥ ५॥
 
 
अनुवाद
विशाललोचने! यह राक्षसराज रावण राख के ढेर के समान सो रहा है। वह बड़ा हिंसक था और ब्रह्माजी ने उसे वरदान दिया था; परन्तु तुम्हारे लिए मैंने उसे मार डाला है॥5॥
 
Vishallochane! This demon king Ravana is sleeping like a heap of ashes. He was a very violent person and Brahmaji had given him a boon; but for you I have killed him.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)