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ramayan 6.123.49: यह वही स्थान है जहाँ मैंने विरधक नामक दैत्य का वध किया था। हे देवि! शरीर के मध्य में! ये वे तपस्वी हैं जिन्हें हमने पहले देखा था॥ 49॥   |   ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  6.123.49 
अस्मिन् देशे महाकायो विराधो निहतो मया।
एते ते तापसा देवि दृश्यन्ते तनुमध्यमे॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
यह वही स्थान है जहाँ मैंने विरधक नामक दैत्य का वध किया था। हे देवि! शरीर के मध्य में! ये वे तपस्वी हैं जिन्हें हमने पहले देखा था॥ 49॥
 
This is the place where I killed the giant Viradhka. O Goddess! In the middle of the body! These are the ascetics whom we had seen earlier.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)