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ramayan 6.123.46-47h: ‘यह शुभ और सुन्दर गोदावरी नदी है, जो स्वच्छ जल से सुशोभित है, और यहाँ केले के वृक्षों से घिरा अगस्त्य ऋषि का आश्रम है।’ 46 1/2.   |   ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  6.123.46-47h 
एषा गोदावरी रम्या प्रसन्नसलिला शुभा॥ ४६॥
अगस्त्यस्याश्रमश्चैव दृश्यते कदलीवृत:।
 
 
अनुवाद
‘यह शुभ और सुन्दर गोदावरी नदी है, जो स्वच्छ जल से सुशोभित है, और यहाँ केले के वृक्षों से घिरा अगस्त्य ऋषि का आश्रम है।’ 46 1/2.
 
‘This is the auspicious and beautiful river Godavari, adorned with clear water, and there is the ashram of the sage Agastya, surrounded by banana groves.' 46 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)