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ramayan 6.123.45-46h: वरवर्णिनी! शुभ कामनाएँ! यह हमारा आश्रम है और वह विचित्र हरा-भरा घर दिखाई दे रहा है, जहाँ राक्षसराज रावण ने आकर बलपूर्वक तुम्हारा अपहरण किया था।   |   ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  6.123.45-46h 
एतत् तदाश्रमपदमस्माकं वरवर्णिनि।
पर्णशाला तथा चित्रा दृश्यते शुभदर्शने॥ ४५॥
यत्र त्वं राक्षसेन्द्रेण रावणेन हृता बलात्।
 
 
अनुवाद
वरवर्णिनी! शुभ कामनाएँ! यह हमारा आश्रम है और वह विचित्र हरा-भरा घर दिखाई दे रहा है, जहाँ राक्षसराज रावण ने आकर बलपूर्वक तुम्हारा अपहरण किया था।
 
Varavarnini! Good luck! This is our ashram and that strange greenhouse is visible, where the demon king Ravana had come and kidnapped you by force.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)