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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  6.123.41-42h 
अस्यास्तीरे मया दृष्टा शबरी धर्मचारिणी॥ ४१॥
अत्र योजनबाहुश्च कबन्धो निहतो मया।
 
 
अनुवाद
इसी पम्पा नदी के तट पर मुझे धर्मपरायण शबरी के दर्शन हुए थे। यहीं पर मैंने कबंध नामक राक्षस का वध किया था, जिसकी भुजाएँ एक योजन लंबी थीं।
 
On the banks of this Pampa river I had the darshan of the pious Shabri. Here is the place where I had killed the demon named Kabandha who had arms one yojana long.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)