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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  6.123.38-39h 
दृश्यतेऽसौ महान् सीते सविद्युदिव तोयद:॥ ३८॥
ऋष्यमूको गिरिवर: काञ्चनैर्धातुभिर्वृत:।
 
 
अनुवाद
'सीते! वह महान् एवं भव्य पर्वत, जो बिजली से चमकते हुए मेघ के समान दिखाई देता है और सुवर्णमय धातुओं से आच्छादित है, ऋष्यमूक कहलाता है।
 
‘Sita! That great and magnificent mountain that appears like a cloud with lightning and is covered with golden metals is called Rishyamuka. 38 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)