श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  6.123.34-35 
सुग्रीवेणाभ्यनुज्ञाता गन्तुं सर्वैश्च वानरै:।
मम चापि प्रियं कार्यमयोध्यादर्शनेन च॥ ३४॥
प्रवेशं चैव रामस्य पौरजानपदै: सह।
विभूतिं चैव सर्वासां स्त्रीणां दशरथस्य च॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
'मित्रो! सुग्रीव की आज्ञा के अनुसार तुम सब लोग अपने पतियों और समस्त वानरों के साथ शीघ्र ही अयोध्या जाने के लिए तैयार हो जाओ। अयोध्या जाकर तुम मेरा प्रिय कार्य भी करोगी। वहाँ हम नगर और जनपदवासियों के साथ श्री राम के नगर प्रवेश का उत्सव देखेंगे। वहाँ हम राजा दशरथ की समस्त रानियों का वैभव भी देखेंगे।'॥34-35॥
 
‘Friends! As per Sugreeva's orders, all of you should quickly get ready to go to Ayodhya with your husbands and all the monkeys. After visiting Ayodhya, you will also do my favourite work. There we will get to see the celebration of Shri Ram's entry into his city along with the people of the city and the district. We will also see the splendour of all the queens of King Dasharath there.'॥ 34-35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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