श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  6.123.31-32 
प्रिये त्वं सह नारीभिर्वानराणां महात्मनाम्।
राघवेणाभ्यनुज्ञाता मैथिलीप्रियकाम्यया॥ ३१॥
त्वर त्वमभिगच्छामो गृह्य वानरयोषित:।
अयोध्यां दर्शयिष्याम: सर्वा दशरथस्त्रिय:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
‘प्रिय! मिथिला की पुत्री सीता को प्रसन्न करने की इच्छा से तुम श्री रघुनाथजी की आज्ञा से समस्त प्रमुख वानरपत्नियों के साथ शीघ्र ही प्रस्थान की तैयारी करो। हम इन वानरपत्नियों को साथ लेकर उन्हें अयोध्यापुरी तथा राजा दशरथ की समस्त रानियों का दर्शन कराएँगे।’॥31-32॥
 
‘Dear! With the desire to please Sita, the daughter of Mithila, you should prepare to leave soon along with all the chief great monkey wives as per the orders of Shri Raghunathji. We will take these monkey wives along with us and show them Ayodhyapuri and all the queens of King Dasharath.’॥ 31-32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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