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श्लोक 6.123.26-27h  |
एवमुक्तोऽथ वैदेह्या राघव: प्रत्युवाच ताम्।
एवमस्त्विति किष्किन्धां प्राप्य संस्थाप्य राघव:॥ २६॥
विमानं प्रेक्ष्य सुग्रीवं वाक्यमेतदुवाच ह। |
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| अनुवाद |
| विदेहनन्दिनी सीता के ऐसा कहने पर श्री रघुनाथजी ने कहा - 'ऐसा ही हो।' फिर किष्किन्धा पहुँचकर उन्होंने अपना विमान रोक दिया और सुग्रीव की ओर देखकर कहा - ॥ 26 1/2॥ |
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| Upon Videhanandini Sita saying this, Sri Raghunath said - 'So be it.' Then, upon reaching Kishkinda, he stopped his plane and looking at Sugreev said -॥ 26 1/2॥ |
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