श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  6.123.23-24h 
अथ दृष्ट्वा पुरीं सीता किष्किन्धां वालिपालिताम्॥ २३॥
अब्रवीत् प्रश्रितं वाक्यं रामं प्रणयसाध्वसा।
 
 
अनुवाद
वलिपालित किष्किन्धापुरी को देखकर सीता प्रेम से विह्वल हो गईं और श्री राम से विनयपूर्वक बोलीं- ॥23 1/2॥
 
After seeing Valipalit Kishkindhapuri, Sita became overwhelmed with love and said politely to Shri Ram - ॥ 23 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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