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ramayan 6.123.21-22h: यह तीर्थ अत्यंत पवित्र और महान पापों का नाश करने वाला होगा। यहीं पर राक्षसराज विभीषण मुझसे मिलने आये थे।   |   ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  6.123.21-22h 
एतत् पवित्रं परमं महापातकनाशनम्॥ २१॥
अत्र राक्षसराजोऽयमाजगाम विभीषण:।
 
 
अनुवाद
यह तीर्थ अत्यंत पवित्र और महान पापों का नाश करने वाला होगा। यहीं पर राक्षसराज विभीषण मुझसे मिलने आये थे।
 
This pilgrimage will be extremely sacred and will destroy great sins. This is where the demon king Vibhishan came to meet me. 21 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)