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ramayan 6.123.2: उस समय रघुकुल के पुत्र श्री राम ने सब दिशाओं में देखकर चंद्रमा के समान सुंदर मुख वाली मिथिला की पुत्री सीता से कहा-॥2॥   |   ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.123.2 
पातयित्वा ततश्चक्षु: सर्वतो रघुनन्दन:।
अब्रवीन्मैथिलीं सीतां राम: शशिनिभाननाम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय रघुकुल के पुत्र श्री राम ने सब दिशाओं में देखकर चंद्रमा के समान सुंदर मुख वाली मिथिला की पुत्री सीता से कहा-॥2॥
 
At that time, Shri Ram, the son of the Raghukul, looking in all directions, said to Sita, the daughter of Mithila, who had a face as beautiful as the moon -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)