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ramayan 6.123.19-20h: 'यह समुद्र के गर्भ में एक विशाल द्वीप है, जहाँ मैंने अपनी सेना के साथ पड़ाव डाला था। यहीं पर पूर्वकाल में भगवान महादेव ने मुझे आशीर्वाद दिया था - सेतु बनने से पूर्व, वे मेरे द्वारा स्थापित होकर यहीं विराजमान हुए थे।॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  6.123.19-20h 
एतत् कुक्षौ समुद्रस्य स्कन्धावारनिवेशनम्॥ १९॥
अत्र पूर्वं महादेव: प्रसादमकरोद् विभु:।
 
 
अनुवाद
'यह समुद्र के गर्भ में एक विशाल द्वीप है, जहाँ मैंने अपनी सेना के साथ पड़ाव डाला था। यहीं पर पूर्वकाल में भगवान महादेव ने मुझे आशीर्वाद दिया था - सेतु बनने से पूर्व, वे मेरे द्वारा स्थापित होकर यहीं विराजमान हुए थे।॥19 1/2॥
 
‘This is a huge island in the belly of the ocean, where I had camped with my army. It was here that Lord Mahadeva had blessed me in the past – before the bridge was built, he had been established by me and had sat here.॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)