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ramayan 6.123.17-18h: 'विदेहनन्दिनी! इस अविनाशी वरुणालय समुद्र को देखो, जो विशाल प्रतीत होता है। यह समुद्र शंखों और कौड़ियों से भरा हुआ, कैसा गर्जना कर रहा है। 17 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  6.123.17-18h 
पश्य सागरमक्षोभ्यं वैदेहि वरुणालयम्॥ १७॥
अपारमिव गर्जन्तं शङ्खशुक्तिसमाकुलम्।
 
 
अनुवाद
'विदेहनन्दिनी! इस अविनाशी वरुणालय समुद्र को देखो, जो विशाल प्रतीत होता है। यह समुद्र शंखों और कौड़ियों से भरा हुआ, कैसा गर्जना कर रहा है। 17 1/2॥
 
‘Videhanandini! Look at this indestructible Varunalaya sea, which appears immense. How this ocean is roaring, full of conch shells and shells. 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)