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ramayan 6.123.16-17h: विशाललोचने! यह वही सेतु है जो मैंने खारे समुद्र में बनाया है, जो नलसेतु के नाम से प्रसिद्ध है। देवि! यह अत्यंत कठिन सेतु आपके लिए ही बनाया गया है।   |   ramayan सर्ग 6.123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  6.123.16-17h 
एष सेतुर्मया बद्ध: सागरे लवणार्णवे॥ १६॥
तव हेतोर्विशालाक्षि नलसेतु: सुदुष्कर:।
 
 
अनुवाद
विशाललोचने! यह वही सेतु है जो मैंने खारे समुद्र में बनाया है, जो नलसेतु के नाम से प्रसिद्ध है। देवि! यह अत्यंत कठिन सेतु आपके लिए ही बनाया गया है।
 
Vishallochane! This is the bridge I have built in the salty sea, which is famous by the name of Nalasetu. Devi! This extremely difficult bridge was built for you only. 16 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)