श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.123.1 
अनुज्ञातं तु रामेण तद् विमानमनुत्तमम्।
हंसयुक्तं महानादमुत्पपात विहायसम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी की आज्ञा पाकर हंससहित वह सुन्दर विमान महान शब्द करता हुआ आकाश में उड़ने लगा॥1॥
 
After receiving the permission of Shri Ram, that beautiful aircraft with swan started flying in the sky making great noises. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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