श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.122.4 
कृतप्रयत्नकर्माण: सर्व एव वनौकस:।
रत्नैरर्थैश्च विविधै: सम्पूज्यन्तां विभीषण॥ ४॥
 
 
अनुवाद
विभीषण! इन सब वानरों ने युद्ध में बहुत परिश्रम किया है; अतः तुम्हें नाना प्रकार के रत्न और धन आदि से इनका सम्मान करना चाहिए॥ 4॥
 
Vibhishana! All these monkeys have put in a lot of effort and hard work in the war; therefore you should honour them with various kinds of gems and wealth etc.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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