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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना
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श्लोक 2
श्लोक
6.122.2
स तु बद्धाञ्जलिपुटो विनीतो राक्षसेश्वर:।
अब्रवीत् त्वरयोपेत: किं करोमीति राघवम्॥ २॥
अनुवाद
राक्षसराज विभीषण ने हाथ जोड़कर बड़ी ही विनम्रता और उत्सुकता से श्री रघुनाथजी से पूछा - 'प्रभो! अब मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?'॥ 2॥
With folded hands, the demon king Vibhishana asked Shri Raghunathji very humbly and eagerly - 'Lord! What service can I do now?'॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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